Posts

Showing posts from September, 2024

अन्तर्गाथा उपन्यास

Image
  मेरे उपन्यास अंतर्गाथा की सुश्री स्वाती सिंह जी द्वारा की गयी समीक्षा साखी अंक 35 में प्रकाशित की गयी है। यह तर्कसंगत विस्तार के साथ की गयी पठनीय समीक्षा है । हार्दिक बधाई  समीक्षक को। 'व्यष्टि से समस्त तक की यात्रा' रामनाथ शिवेन्द्र सोनभद्र की मिट्टी में जन्मा वह साहित्यिक नाम है जो चन्दौली, बनारस समेत समस्त पूर्वांचल की सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों को रचनात्मक कलेवर प्रदान करता है। उच्च शिक्षा बनारस में होने के कारण बनारसी संस्कृति एवं मिजाज उनके भाषात्मक गढ़न से मिलकर अपने समय से मजबूत अंतर्क्रियात्मक सम्बन्ध स्थापित करते हैं। सन् 2015 में प्रकाशित उनके उपन्यास 'अंतर्गाथा' की बात करें तो यह उपन्यास अपने शीर्षक के अनुरूप ही अनेक गाथाओं का समुच्चय बनकर उभरता है जिसमें ये गायाएं एक-दूसरे के भीतर से निकलती, उनका विभेद करती और पुनः उसी में समायी हुई सी जान पड़ती हैं। ये गाथाएं समाज के सामान्य जन-जीवन के बीच से ही निकलकर साधारण चरित्रों की रोजमर्रा के आश्रय में आकार लेती हैं। उपन्यास का कलेवर काफी विस्तृत है जो बनारस की मुख्य कथाभूमि से निकलकर लखनऊ और बम्बई तक की सैर ...